My Poems
जुनूँ को आज़माना चाहिए था । भँवर में डूब जाना चाहिए था।
हज़ारों सितारों में एक चमकता है तेरे लिए, हर साँस में मैं जीता था अब धड़कता है तेरे लिए।
ये जो महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने वाली नारियाँ हैं, इनके भीतर भी कुछ अनकही, अनसुनी कहानियाँ हैं।
बिछड़ जाने का उसको भी ग़म तो होगा, मगर उस ग़म में अब पहले सा दम तो होगा।
उसे जो कह न पाया, दिल में ही वो कहा रह गया, सफ़र में साथ चलना था, मगर वो फ़ासला रह गया।
तेरे जाने के बाद दिल को सुकून ये मिला, मैं अपनी साँसों को ख़ुद ही मनाने लगा हूँ, मैं अब ख़ुद को पसंद आने लगा हूँ…
माना कि सारी गलती मेरी है, मैं क़बूल करता हूँ, जो टूटा था हमारे बीच, वो डोरी है - मैं क़बूल करता हूँ।
उसने पूछा क्या हो तुम मैंने कहा, मैं कुछ भी नहीं
माँ कैसे सजदा करूँ मैं तेरा, कैसे मैं तेरे ममत्व का कर्ज़ चुकाऊँगा? बस चलेगा गर मेरा, तो फिर से बच्चा बन, तेरी गोद में सो जाऊँगा।
अपने हाथ में जो मेहंदी तुमने मेरे नाम की रखी है, हर लकीर में अब तक इक अधूरी शाम की रखी है।
मैं तो जीना सीख गया, टूटकर भी मुस्कुराना सीख गया, पर सिखाया किसने… तेरे प्रेम ने,
अगर रख सको तो निशानी हूँ मैं, खो दो तो एक कहानी हूँ मैं, रोक पाए ना जिसको ये सारी दुनियाँ, वो एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं, सबको प्यार देने की आदत है हमें, अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमें, कितना भी गहरा ज़ख़्म दे कोई, उतना ही ज़्यादा मुस्कुराने की आदत है हमें, एक अजनबी दुनियाँ में अकेला ख़्वाब हूँ मै, सवालों से ख़फ़ा छोटा सा जवाब हूँ मै, जो समझ ना सके मुझे, उसके लिए ‘कौन’, जो समझ गए, उसके लिए खुली किताब हूँ मैं, आँख में देखोग़े तो खुश पाओगे, दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं, अगर रख सको तो निशानी हूँ मैं, खो दो तो एक कहानी हूँ मैं।।
हम युवाओं की दहाड़ है, माँ भारती की पुकार है|
छोटे घर का बड़ा बेटा हूँ मैं, परिवार वालों की नज़र में…
वो दोस्त भी है मेरे लिए और दुश्मन भी, वो दरिया भी है मेरे लिए और समंदर भी,
किताबें बोलती है, हमारे दिमाग़ के पट खोलती है, हमें इस दुनिया से जोड़ती है ।
जब क़िस्मत की बात आती है, ज़िंदगी कुछ धुँधली नज़र आती है।
एक दिन नींद भी पूरी होगी